आदिवासी अनामत बचाओ आंदोलन

जय जोहार!

ज़मीन, जंगल, ज़बान और अधिकार — हर आदिवासी की अनामत, हर आदिवासी की आवाज़।

जय जोहार पार्टी आदिवासी समाज के संवैधानिक अनामत अधिकारों की रक्षा, आदिवासी अस्मिता के संरक्षण और समान भागीदारी के लिए संकल्पित एक जनआंदोलन है। गाँव-गाँव, पंचायत-पंचायत — हम मिलकर अपने अधिकारों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

गाँव-गाँव, हर पंचायत तक
जय जोहार! • अनामत बचाओ, अधिकार जगाओ! • जल-जंगल-ज़मीन हमारा अधिकार! • आदिवासी एकता ज़िंदाबाद! • जय जोहार! • अनामत बचाओ, अधिकार जगाओ! • जल-जंगल-ज़मीन हमारा अधिकार! • आदिवासी एकता ज़िंदाबाद! •
भगवान बिरसा मुंडा
प्रेरणा

भगवान बिरसा मुंडा

"धरती आबा" — आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों के प्रेरणास्रोत

भगवान बिरसा मुंडा (15 नवंबर 1875 – 9 जून 1900) झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र के मुंडा जनजाति में जन्मे एक आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और लोकनायक थे। उन्होंने "उलगुलान" (महाविद्रोह) आंदोलन का नेतृत्व करते हुए ब्रिटिश शासन, ज़मीन हड़पने की नीतियों और शोषण के विरुद्ध आदिवासी समाज को संगठित किया। उनके संघर्ष का ही परिणाम था छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (1908), जिसने आदिवासी भूमि की रक्षा की। मात्र 25 वर्ष की आयु में रांची जेल में उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी वे आदिवासी स्वाभिमान और अधिकारों के प्रतीक हैं।

15 नवंबर — जनजातीय गौरव दिवस
हमारे बारे में

क्यों बनी जय जोहार पार्टी?

दशकों के संघर्ष के बावजूद आदिवासी समाज को शिक्षा, रोज़गार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में मिला संवैधानिक अनामत आज कई स्तरों पर कमज़ोर किए जाने के जोखिम में है। निजीकरण, आउटसोर्सिंग और बैकलॉग रिक्तियों की अनदेखी का सीधा असर आदिवासी युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।

जय जोहार पार्टी का जन्म इसी चिंता से हुआ — गाँव-गाँव, पंचायत-पंचायत आदिवासी समाज को संगठित कर उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त, आत्मनिर्भर आदिवासी समाज की नींव रखना।

जल
जंगल
जमीन

हमारा संकल्प

संविधान द्वारा प्रदत्त अनुसूचित जनजाति अनामत का पूर्ण, पारदर्शी और ससमय क्रियान्वयन — बिना किसी कटौती या देरी के — हर स्तर पर सुनिश्चित करना।

हमारा मिशन

छह स्तंभ, एक लक्ष्य

अनामत की रक्षा

शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में संवैधानिक अनामत का पूर्ण एवं ससमय क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।

भूमि व वन अधिकार

वन अधिकार अधिनियम व पेसा कानून का सख़्ती से पालन, आदिवासी भूमि हस्तांतरण पर रोक।

राजनीतिक भागीदारी

पंचायत से लेकर विधानसभा-संसद तक आदिवासी प्रतिनिधित्व को मज़बूत करना।

शिक्षा व रोज़गार

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति और आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय रोज़गार के अवसर बढ़ाना।

संस्कृति व भाषा संरक्षण

आदिवासी बोलियों, पर्व-परंपराओं और सामुदायिक पहचान का संरक्षण व संवर्धन।

समावेशी विकास

विस्थापन-प्रभावित परिवारों के पुनर्वास व स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करना।

घोषणा पत्र

मुख्य माँगें

जय जोहार पार्टी सरकार और समाज के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखती है

०१

बैकलॉग रिक्तियाँ शीघ्र भरी जाएँ

अनुसूचित जनजाति अनामत कोटे की सभी लंबित बैकलॉग रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरा जाए।

०२

निजीकरण में भी अनामत सुनिश्चित हो

निजीकरण व आउटसोर्सिंग की प्रक्रियाओं में भी आदिवासी अनामत सुनिश्चित करने हेतु ठोस नीति बनाई जाए।

०३

पेसा व वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी पालन

पेसा अधिनियम व वन अधिकार अधिनियम का ग्राम सभा स्तर पर ईमानदारी से क्रियान्वयन हो।

०४

भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की सहमति

आदिवासी बहुल क्षेत्रों में किसी भी भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की अनिवार्य व स्वतंत्र सहमति ली जाए।

०५

छात्रवृत्ति व छात्रावास सुविधाओं में वृद्धि

आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति राशि और छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाए।

०६

राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सशक्त हो

पंचायत व विधानसभा स्तर पर आदिवासी प्रतिनिधित्व को और अधिक सशक्त व सार्थक बनाया जाए।

आंदोलन से जुड़ें

आज ही सदस्य बनें

अपने गाँव और समाज के भविष्य के लिए आवाज़ बनें। सदस्यता निःशुल्क है — बस नीचे अपना विवरण भरें, हमारी टीम आपसे संपर्क करेगी।

  • गाँव व पंचायत स्तर पर संगठन से जुड़ें
  • स्थानीय बैठकों व कार्यक्रमों की जानकारी पाएँ
  • अपने क्षेत्र की समस्याएँ सीधे पार्टी तक पहुँचाएँ
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